Sad shayari




#जिसके नसीब में हों जमानें की ठोकरें, 
उस बदनसीब से न सहारे की बात कर। 

#आँखें थक गई हैं अब आसमान को देखते देखते, 
पर वो तारा नही टूटता जिसे  देख कर तुझे माँग लूँ। 

#हम तो मजाक मे भी किसी का दिल दुखाने से डरतें हैं, 
पता नही कैसे लोग सोच समझ कर भी दिलों से खेल जाते हैं।

#दिल गुमसुम, जूबं खामोश, यें आँखें आज नम क्यों हैं। 
जो कभी अपना हुआ ही नही, उसे खोने का गम क्यों है 

#आदत बदल सी गई है वक्त काटने की, 
हिम्मत ही नही होती अब दर्द बांटने की। 













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